गुरुवार 29 जनवरी 2026 - 11:20
ईरान की रूहानी क़यादत, वैश्विक उपनिवेशवाद के सामने उसूल पसंदी की निशानी हैः आका सय्यद हसन मूसवी

हौज़ा / अंजुमन शरई शियान जम्मू कश्मीर के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद आगा हसन मूसवी ने अपने एक बयान मे इस्लामी गणतंत्र ईरान की कयादत को रूहानी, अखलाक़ी और राजनीतिक मजबूती का व्यवहारिक रूप बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, जुमन शरई शियान जम्मू कश्मीर के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद आगा हसन मूसवी ने अपने एक बयान मे इस्लामी गणतंत्र ईरान की कयादत को रूहानी, अखलाक़ी और राजनीतिक मजबूती का व्यवहारिक रूप बताया।

उन्होने कहा कि ईरान ने वैश्विक दबाव और अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के हालिया विरोधाभासी बयानाच के बा वजूद अपने उसूल, ईमान और अखलाक़ी नेतृत्व पर दृढ़ता का मुज़ाहेरा किया है।

आक़ा सय्यद हसन ने कहा कि ईरान के क़यादत, हज़रत इमाम रुहुल्लाह खुमैनी और सुप्रीम लीडर के मार्गदर्शन मे केवल सैन्य या आर्थिक शक्ति के बल बूते पर नही, बल्कि इलाही उसूलो, अदल, इंसाफ और अखलाक़ी जुरअत की बुनयाद पर आलमी दबाव का सामना कर रही है।

उन्होने कुरआनी और एतिहासिक उदाहरणो के माध्यम से जोर दिया कि फ़िरऔन ने अपने सैनिक, दौलत और शक्ति के बल बूते पर बनी इजराईल पर अत्याचार किया, मगर अंतः अल्लाह की कुदरत से समुद्र मे डूब गया य(यासीन, 90-92)

नमरूद ने हज़रत इब्राहीम के संदेश को खारिज किया, अत्याचार और घमंड पर आधारित सरकार की, लेकिन हक और अदल के सामने उसका परिणाम अपमानजनक रहा।

सय्यद हसन मूसवी ने आगे कहा कि यह ुउदाहरण स्पष्ठ करते है कि वास्तविक शक्ति अत्याचार, दौलत या दबाव से नही, बल्कि उसूल, ईमान और अखलाकी पक्केपन से है। इमाम खुमैनी ने इसी उसूल को वैश्विक उपनिवेशवाद के सामने एक मजबूत बा वक़ार और सम्मानित प्रतिरोधी तरीके के तौर पर लागू किया और हज़रत  जो इमाम ख़ामेनाई ने इस व्यवहारिक और नैतिक दृढता के साथ आगे बढ़ाया। 

उन्होने ट्रम्प के बयानात को वैश्विक उपनिवेशवाद की कमज़ोरी और ईरान की बढ़ते हुए प्रतिरोध की निशानी बताते हुए कहा कि आज़ वैश्विक इरादे जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्थापित किए गए, स्वयं बे बस और कमज़ोर हो चुके है।

सय्यद हसन मूसवी ने दुनिया भर के मस्लमानो, आज़ाद कौमो और खुद मुखतार सरकारो से मांग की है कि वह अमेरिकी व्यापार और उपनिवेशवादिक रवयै की निंदा करे और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान के उसूली स्टेंड का समर्थन करे।

उन्होने क़ुरआन की आयत पेश की इन्नल लज़ीना कफ़रू युनफ़ेक़ूा अमवालहुम लयोसद्दूना अन सबीलिल्लाहे फसयुनफ़ेक़ूनहा सुम्मा तकूनू अलैहिम हसरतन सुम्मा योअलबूना वल लज़ीना कफ़रू ऐला जहन्नमा योहशरूना, जो लोग अल्लाह के मार्ग से रोकने के लिए अपनी धन और दौलत खर्च करते है उन पर वह जाए हो जाएगी और वह पराजित हो जाएंगे। और काफ़िर जहन्नम मे जमा किए जाऐंगे, (सूर ए अफ़ाल, आयत 36)

उन्होने जोर दिया कि आज ईरान एक सरकार नही बल्कि एक जिंदा फ़लसफ़ा, अखलाक़ी प्रतिरोध की निशानी और आलम ए इस्लाम के लिए रूहानी व सियायी मशअल राह है। 

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